गजलें

 1

पैली बेर को ऐसो बरसो, 
सबरो जिया जुड़ा गओ तरसो।
बीज करो सरजू की अम्मा,
भ्याने नईं तो बै दें परसों।
भैसें बाँध देव बहार खों,
जुड़ा जान दो उने भीतर सों।
पर को बीज अब धरो कां है,
डेओढ़ लगी न, बीते बरसों।
तिली मूंग कतकी ने खा लए,
चैती लील गई सब सरसों।
हर साल सो हर न रावै,
हाथ जोर कै दो हर सों।

2

ठेका वारी दारू पीके,
बड़े पावने भौत नसाने।
डरे रात कउ नाली मेंहा,
होंस कछु न रात ठिकाने।
हम तो सांसू कै-कै हारे,
बात सुने न एकउ माने।
बिटिये मारे, बार उखारे,
कभउँ पकर उन्ना दे ताने।
रकम कमाबे की कोउ काबे,
सौ-सौ हीला करे बहाने।
बड़े दुखन से बिटिया रै रई,
सांसू एक न देत उराने।
निभा-निभा के सबरो सै रई,
बड़े पावने भौत नसाने।

3

ओ दइया जो आओ बुढ़ापो।
मरवे खां तरसाओ बुढ़ापो।
करयाई नईं सूधी हो रई,
मजबूरी सी लाओ बुढ़ापो।
जो जाड़ो अब कैसे कटने,
पल्ली में भरयाओ बुढ़ापो।
बउएं लरका सब ललकारें,
फांसी-सी ले आओ बुढ़ाप।
मोरे रये से घर की सोभा,
बिगरे ऐसो आओ बुढ़ापो।
दो रोटी भी भारी हो गई,
विधना काय बनाओ बुढ़ापो।

4

प्रमान पत्र जाति को बन्ने,
हमें बता दो का का कन्ने।
मौड़ा पढ़न जात नवोदा में,
ईके बिना काम नईं चलने।
बकील साब तुम बनवा तो दो,
नइँतर सबरी बात बिगन्ने।
सुन ले भैया राम औतार,
खर्चा तोखां परहे कन्ने।
पैला बन है आय निवास,
दूसरां फारम जाति को भन्ने।
तीन तीन सौ आय निवास के,
पाँच सौ रुपया जाति के धन्ने।
सरपंच पटवारी से दस्कत करा ले,
दो गवाय गाँव के कन्ने।
ग्यारा सौ रुपया मेज पे धर दे,
हर चार दिना में दौरा कन्ने।
इतनो गर जो कर देहे ता,
घर बैठे तोय जाति मिलने।

5

आसों बाई खों पानी भरवो, जादा कार्रो पर गओ,
मैं होती तो भर देती।
आहा दइया जेठ मास में, अच्छो धमका पर गओ
मैं होती तो छाया कर देती।
बंधो-बंधो ऊ कारो बुकरा, जीब निकारें मर गओ,
मैं होती तो सानी धर देती।
तीन दिना से बिकट प्यासो, नटवा टलवा हो गओ,
मैं होती तो उसार कर देती।
बाई कात के खेंचत पानी, हाथ फफोला पर गओ,
मैं होती तो मल्लम भर देती।
ई देश के सिंहासन से, करुना भाव निकर गओ,
मैं होती तो भर देती।

6

पानी छुओ सो उनने धुन दओ ,
दद्दा कात कछु न कइये।
कक्का जू ने चपटो कर दओ ,
दद्दा कात कछु न कइये।
दाऊ जू ने गल्ला धर लओ ,
दद्दा कात कछु न कइये।
उनकी भैंसन ने खितवा चर लओ ,
दद्दा कात कछु न कइये।
बड़े-बड़न ने मन को कर लओ ,
दद्दा कात कछु न कइये।
'परमा' कात के कब लो चल है ,
दद्दा कात कछु न कइये।

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